Thursday, 19 August 2021

ऋग्वेद

 



                  ऋग्वेद

ऋग्वेद की परिभाषाऋक अर्थात् स्थिति और ज्ञान ऋग्वेद सबसे पहला वेद है जो पद्यात्मक है। इसमें सबकुछ है। यह अपने आप में एक संपूर्ण वेद है। ऋग्वेद अर्थात् ऐसा ज्ञान, जो ऋचाओं में बद्ध हो।
ऋग्वेद का परिचयइसके 10 मंडल (अध्याय) में 1028 सूक्त है जिसमें 11 हजार मंत्र (10580) हैं। प्रथम और अंतिम मंडल समान रूप से बड़े हैं। उनमें सूक्तों की संख्या भी 191 है। दूसरे से सातवें मंडल तक का अंश ऋग्वेद का श्रेष्ठ भाग है। आठवें और प्रथम मंडल के प्रारम्भिक 50 सूक्तों में समानता है।

ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के रचयिता अनेक ऋषि हैं जबकि द्वितीय के गृत्समय, तृतीय के विश्वासमित्र, चतुर्थ के वामदेव, पंचम के अत्रि, षष्ठम् के भारद्वाज, सप्तम के वसिष्ठ, अष्ठम के कण्व व अंगिरा, नवम् और दशम मंडल के अनेक ऋषि हुए हैं।

नवां मंडल सोम संबंधी आठों मंडलों के सूक्तों का संग्रह है।

दसवें मंडल में औषधि सूक्त यानी दवाओं का जिक्र मिलता है।

ऋग्वेद में ही मृत्युनिवारक त्र्यम्बक-मंत्र या मृत्युंजय मन्त्र वर्णित है।
विश्व-विख्यात गायत्री मन्त्र भी इसी में वर्णित है। 

ऋग्वेद की रचनाओं को पढ़ने वाले ऋषि को होतृ कहते हैं

विश्वामित्र द्वारा रचित ऋग्वेद के तीसरे मंडल में सूर्य देवता सावित्री को समर्पित प्रसिद्ध गायत्री मंत्र है।

8 वें मंडल की हस्त लिखित ऋचाओं को खिल कहा जाता है।

ऋग्वेद के कई परिच्छेद में प्रयुक्त अधन्य शब्द का संबंध गाय से है।

                  Thanks for watching.

English सहायता

ANTONYMS WORDS

             Antonyms                       विलोम शब्द अर्थ - विलोम शब्द वह होता है।जो किसी शब्द के  अर्थ को उल्टा प्रदर्शित करता है। ...